Friday, June 1, 2007

पिकनिक



मम्मी से रोटी बनवाई
और बहिनों ने खीर बनाई।
भैय्या जी से प्रेस कराई
पिकनिक की तैयारी करके
मुन्नू जी अब घर से निकले।

टीचर ने सबको समझाया
बस में सीटों पर बैठाया
घुर-घुर कर बस चलती जाती
पों-पों करती धुंआं उड़ाती
गुड़िया अपना गीत सुनाती।

गलियां-सड़कें-हाट-बाजार
बस सबको कर जाती पार
कई चढ़ाव और कई उतार
कानन पेंडारी वन आया
बस चालक ने ब्रेक लगाया।

एक-एक करके सारे बच्चे
बस की खिड़की खोल के उतरे
देखा एक बड़ा-सा भालू
काले मुंह का बन्दर कालू
चबा रहा था कच्चा आलू।

सबको टीचर ने बुलवाया
एक जगह सबको बैठाया
बच्चों अपने टिफिन उठाओ
मिल जुलकर सब खाना खाओ
फिर नल से पानी पी आओ।

पिकनिक खत्म हुई सब बच्चे
बस में सीटों परे बैठे
मुन्नी ने अब कविता सुनाई
बस सब को वापस ले आई
खत्म हो गई पिकनिक भाई।

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