Friday, June 1, 2007

काली कोयल



काली कोयल सबको भाती
फुदक-फुदक कर गीत सुनाती।
गीत सुनाकर मन बहलाती
मन बहलाकर फिर उड़ जाती।

कोयल, तुम रोजाना आओ
सब बच्चों को गीत सुनाओ।
गीत सुनाकर खेल खिलाओ
सब बच्चों में मेल बढ़ाओ।

कोयल तुम हो बहिन हमारी
सबकी भारत माता प्यारी ।
जिस माता ने जनम दिया है
पाल-पोसकर बड़ा किया है।

माँ सबको देती है दाना
उसने तुम्हें सिखाया गाना।
तुम जैसा गाना हम गायें
भारत माँ का मान बढ़ायें।

अच्छा कोयल अब तुम जाओ
इसी समय कल फिर से आओ।
हम सब अब पढ़ने जायेंगे
पढ़-लिखकर नाम कमायेंगे।

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