कविता कवि की भावनाओं का सार होती है और इस तथ्य को श्री हिदायत अली कमलाकर जी ने अपनी काव्य रचनाओं के माध्यम से सिद्ध किया है। विगत कुछ समय पूर्व कमलाकर जी खंडकाव्य कालजयी प्रकाशित हुई जो मेरा प्रथम प्रकाशन था। कमलाकर जी ने एक क्रीड़ा अधिकारी के रूप में 40 वर्षों तक सेवा प्रदान की, साथ ही अपने कर्त्तव्य का निर्वाह करते हुए वे साहित्य-सेवा में भी बढ़-चढ़ कर योगदान करते रहे ।
कमलाकर जी ने बच्चों से लेकर हर आयु के लिये कुछ न कुछ अवश्य ही लिखा है। मेरी दृष्टि से कमलाकर जी इस युग के कवि कबीरदास हैं। जिसने अपना भावनाओं को शब्दों की माला में पिरोया है। कमलाकर जी ने अपने जीवन में जो भी अनुभव प्राप्त किया। उसे अपनी रचनाओं में ढाला है। इसी कारण मैं इनकी रचनाओं से जुड़ी हूँ। इनकी रचनाओं में जीवन का सार छिपा है, जो पाठकों के भीतर एक नई रोशनी प्रदान करती है। कमलाकर जी की रचनाओं में भाषा की सरलता, शब्दों को महत्व, एकता की भावना, सत्यता, अनुभव का निचोड़ पाया जाता है। जिसके कारण कमलाकर जी पाठकों मन में निवास करते हैं।
कमलाकर जी की नई रचना “कहीं से भी पढ़ लो” आपके समक्ष है, यदि प्रकाशन में कहीं कोई कमी लगे, तो अनमोल सुझावों से अवगत करायें।
कमलाकर जी ने बच्चों से लेकर हर आयु के लिये कुछ न कुछ अवश्य ही लिखा है। मेरी दृष्टि से कमलाकर जी इस युग के कवि कबीरदास हैं। जिसने अपना भावनाओं को शब्दों की माला में पिरोया है। कमलाकर जी ने अपने जीवन में जो भी अनुभव प्राप्त किया। उसे अपनी रचनाओं में ढाला है। इसी कारण मैं इनकी रचनाओं से जुड़ी हूँ। इनकी रचनाओं में जीवन का सार छिपा है, जो पाठकों के भीतर एक नई रोशनी प्रदान करती है। कमलाकर जी की रचनाओं में भाषा की सरलता, शब्दों को महत्व, एकता की भावना, सत्यता, अनुभव का निचोड़ पाया जाता है। जिसके कारण कमलाकर जी पाठकों मन में निवास करते हैं।
कमलाकर जी की नई रचना “कहीं से भी पढ़ लो” आपके समक्ष है, यदि प्रकाशन में कहीं कोई कमी लगे, तो अनमोल सुझावों से अवगत करायें।
डॉ. श्रीमती शाज़िया जाविद अली
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