Friday, June 1, 2007

आत्मकथन - कमलाकर

मेरा यह प्रथम काव्य पुष्प ‘काठ का घोड़ा’ देश नौनिहालों को आदर्श नागरिक बनाने के उद्देश्य से प्रकाशित किया जा रहा है । मुझे आशा है, इसकी शिक्षाप्रद रचनाओं से अनुप्रेरित होकर इक्कीसवीं सदीं के भावी निर्माता लाभान्वित होंगे।

इस काव्य की रचना के लिये मुझे श्री रामबाबू सोंथलिया एवं अनेक स्थानीय साहित्यकारों की प्रेरणा मिली है, स्थानाभाव से मैं उनके नामों का उल्लेख नहीं कर पा रहा हूं, परन्तु में उनका सदा आभारी रहूंगा।

काव्य संग्रह को मुद्रित करने के लिये श्री महेन्द्रपाल सेठी ने विशेष रुचि दिखाई, जिसके लिये वे धन्यवाद के पात्र हैं।

हिदायत अली ‘कमलाकर’
15 अगस्त 95

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