इस काव्य की रचना के लिये मुझे श्री रामबाबू सोंथलिया एवं अनेक स्थानीय साहित्यकारों की प्रेरणा मिली है, स्थानाभाव से मैं उनके नामों का उल्लेख नहीं कर पा रहा हूं, परन्तु में उनका सदा आभारी रहूंगा।
काव्य संग्रह को मुद्रित करने के लिये श्री महेन्द्रपाल सेठी ने विशेष रुचि दिखाई, जिसके लिये वे धन्यवाद के पात्र हैं।
हिदायत अली ‘कमलाकर’
15 अगस्त 95
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