Friday, June 1, 2007

भूमिका-महाबीर सिंह बघेल


भूमिका
नगर के जाने माने कवि श्री हिदायत अली ‘कमलाकर’ की भाषा भावपूर्ण, ओजपूर्ण एवं सहज होती है।

बाल साहित्य मनोरंजन होने के साथ-साथ शिक्षाप्रद भी होना चाहिए, जिससे बालकों का बौद्धिक विकास भी हो, वे अच्छे आचरण ग्रहण कर आदर्श नागरिक बनें।

श्री ‘कमलाकर’ की यह काव्य रचना ‘काठ का घोड़ा’ इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिये प्रकाशित की जा रही है। इसमें संग्रहित 15 कविताएं बच्चों के आसपास के वातावरण को परिलक्षित करती हैं। कवि का प्रयास प्रशंसनीय है। शुभकामनाओं के साथ भविष्य में उनसे ऐसे प्रकाशनों की आशा है।


महाबीर सिंह बघेल
उपकुलसचिव
गुरु घासीदास विश्वविद्यालय,
बिलासपुर (म.प्र.)

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