Friday, June 1, 2007

अभिव्यक्ति


बच्चों के लिये लिखना बड़ दुष्कर काम है । हाँ, यदि आप बच्चें हो सकते हैं, तो यह दुष्कर काम बडा़ सहज हो जाता है । तब आपको आयु की सीमा लांघनी होगी और यदि आपने यह सीमा लांघ ली तो समझ लीजिए आपने संसार की सारी खुशियाँ समेट ली। फिर न आप जवान रहे न बूढ़े....। यही बच्चों के लिये लिखने का लाभ है।

इस “बाल कविता भाग-2” में मेरी वह रचनायें हैं जिन्हें मैं घर में बच्चों को गा-गाकर सुनाता रहता हूँ । अब यदि मेरी पुत्र-वधु डॉ. शाजिया इसे छपवा दें तो वह धन्यवाद की पात्र हैं, क्योंकि वह भी तो छुपे-दुपे इन रचनाओं को सुनती रही हैं ।

0कमलाकर
रामनवमीं
31 मार्च 2007

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