बच्चे भगवान का रूप होते हैं, उनकी परवरिश, संस्कार, शिक्षा-दीक्षा की जिम्मेदारी हमारी है। आज का बाल-गोपाल भविष्य में देश का अच्छा नागारिक व उच्च अधिकरी बनें । इस उद्देश्य से कवि कमलाकर जी ने बाल साहित्य की ओर कदम बढ़ाया । बाल साहित्य मनोरंजक होने के साथ-साथ शिक्षा प्रद होना जरूरी है, जिससे बालक का बौद्धिक, सामाजिक, सांस्कृतिक विकास हो, वे अच्छे आचरण ग्रहण कर आदर्श नागरिक बनें । श्री कमलाकर जी ने इसी उद्देश्य हेतु बाल कविता भाग-2 की रचना की है। बाल साहित्य के क्षेत्र में केमलाकर जी का प्रारंभ से ही काफी योगदान रहा है जो सराहनीय है।
डाँ.श्रीमती शाज़िया जाविद अली
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