टूट गया मुन्ने का हाथी।
मुन्ने को आ गई रुलाई।
मुन्नी गोंद की शीशी लाई।
बड़े जतन से सूंड को उसने।
हाथी के सिर से चिपकाई।
मुन्ने की बन्द हुई रुलाई।
फिर मुन्ने का टूटा घोड़ा।
मुन्नी लाई एक हथौड़ा।
बड़े जतन से टांग को उसने।
ठीक-ठाक घोड़े से जोड़ा।
फिर घोड़े की पूंछ को मोड़ा।
मुन्ने को आ गई हंसाई।
लड्डू-पेड़ा और जलेबी।
चमचम-पूरी दूध-मलाई।
मुन्नी फिर एक टॉक लाई।
खुशी-खुसी मुन्ने ने खाई।
अब मत रोना मेरे भाई।
खेल छोड़कर करो पढ़ाई।
लेकिन मुन्ना फिर भी रूठा।
बोली मुन्ना अब क्यों रूठा।
रोते-रोते मुन्ना बोला।
टूट गया है मेरा जूता।
अब मुन्नी को गुस्सा आया।
मुन्ने की हो गई पिटाई।
टूट गया मुन्ने का हाथी।
मुन्ने को आ गई रुलाई।
मुन्नी गोंद की शीशी लाई।
बड़े जतन से सूंड को उसने।
हाथी के सिर से चिपकाई।
मुन्ने की बन्द हुई रुलाई।
फिर मुन्ने का टूटा घोड़ा।
मुन्नी लाई एक हथौड़ा।
बड़े जतन से टांग को उसने।
ठीक-ठाक घोड़े से जोड़ा।
फिर घोड़े की पूंछ को मोड़ा।
मुन्ने को आ गई हंसाई।
लड्डू-पेड़ा और जलेबी।
चमचम-पूरी दूध-मलाई।
मुन्नी फिर एक टॉक लाई।
खुशी-खुसी मुन्ने ने खाई।
अब मत रोना मेरे भाई।
खेल छोड़कर करो पढ़ाई।
लेकिन मुन्ना फिर भी रूठा।
बोली मुन्ना अब क्यों रूठा।
रोते-रोते मुन्ना बोला।
टूट गया है मेरा जूता।
अब मुन्नी को गुस्सा आया।
मुन्ने की हो गई पिटाई।
Friday, June 1, 2007
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