मेरा लेखन धीमी गति से यात्रा करता है परन्तु विलम्ब से ही सही परिणाम ही होता है। ‘समर्थ राम’ भी कुछ गति से यात्रा का अंत पा सका। मुझे अपनी ओर से इस यात्रा के संबंध में कुछ भी नहीं कहना है जो कहना था उसे भाई डॉ. विजय सिन्हा ने कह दिया है। हाँ, मर्यादा पुरुषोत्तम राम पर यह मरा मौलिक चिंतन है इसे किसी विशेष प्रयोजन बंधन से बांध कर न देखा जाये ।
ख्यातिमान गीत कवि डॉ. अजय पाठक का आभारी हूँ जिन्होंने इस संकलन के प्रकाशन का बीड़ा उठाया, मैं उनके गीतों का प्रशंसक रहा हूँ। ‘समर्थ राम’ को प्रकाशन में प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से जिनका सहयोग प्राप्त हुआ वे सब के सब धन्यवाद के पात्र हैं। मेरा परिवार मेरे लेखन में सदा से सहयोगी रहा है। सभी धन्यवाद और आशीर्वाद के पात्र है।
कमलाकर
दिनांक-राम नवमी
06 अप्रैल 2006
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