Friday, June 1, 2007

9.मीठी आम खिला दो



काला कौवा बहुत दूर से
उड़ता-उड़ता आया
देखी आम्र वृक्ष के नीचे
सुन्दर शीतल छाया

बैठ उसी के नीचे कौवा
करने लगा विश्राम
आम्र वृक्ष में लगे हुये थे
मीठे-मीठे आम

मीठे-मीठे आम देख कर
कौवे का मन ललचाया
था कौवा चालाक किन्तु
मन में विचार यह आया

बिन पूंछे क्यों चोरी करके
यह मीठे फल खाऊं
पाप कर्म करके क्यों कर
मैं गुनहगार कहलाऊं

कूं-कूं करती कोयल रानी
गाना गाती आई
कौवा जी को बैठा देखा
मन ही मन मुस्काई

देखा कोयलिया रानी को
कौवा ने मुंह खोला
मीठी आम खिला दो
कौवा, कौवालिया से बोला

तोड़ डाल से कोयल रानी
लाई मीठा आम
खाकर आम उड़ गया कौवा
करके जय-जय राम

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