पुष्प न तोड़ों डाली पर खिलने दो
भंवरों की गुन-गुन से मिलने दो
पुख्प वहीं पर अच्छा लगता है
जैसे घर में बच्चा लगता है....
पुष्प....
पुष्पों की ज्यो गंध न्यारी
बच्चों की गुंजित किलकारी
शोर-शराबा हो हल्लारी
माली को अच्छा लगता है....
पुष्प....
मंद समीर से हिलना-डुलना
हंसना, हंसते हुये मचलना
नयनों की ज्योति में वलना
कितना प्यारा लगता है.....
पुष्प.....
बड़ो भोर की शीतल छाया
बनी धूप में उत्तम काया
ताता-थैय्या नाच नचाया
ठुमुक-ठुमुक ठैय्या लगता है....
पुष्प....
रजनीगंधा और चमेली
कली कली लगती अबेली
सजकर बैठी सखी-सहेली
लाल गुलाब भैय्या लगता है...
पुष्प....
गुड्डा गुड़ियों का दरबार
घर में लगता है बाजार
दादा-दादी करते प्यार
बच्चों को अच्छा लगता है...
पुष्प....
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Friday, June 1, 2007
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