Friday, June 1, 2007

5. रोतो को हंसना सिखलाओ



बच्चों के संग लगा न मेला
जो बच्चों के साथ न खेला

उसने जीवन में क्या पाया
सारा जीवन व्यर्थ गंवाया।

कहाँ शांति रही आजकल
महंगा दूथ दही आजकल ।

सूख रही बच्चों की काया।
कोई अच्छा करो उपाया ।

जो बच्चों को सुख पहुंचाये
अक्षर-गिनती गीत सिखाये
बच्चें बने भविष्य की माया।

रोतो को हंसना सिखलाओ
भूले को रस्ता दिखलाओ
भूखे को खाना खिलवाओ
सेवा सुख तरुवर की छाया।

अच्छी बातें करना वाला
कभी न दुख से डरने वाला
साहस कभी न खोने वाला
तरणी खींच किनारे लाया....।

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