Friday, June 1, 2007

3.आओ खेलें खेल



आओ खेलें खेल अच्छे
खेल के मैदान में ।
या कि जाये घूमने
फूलों भरे उद्यान में ।

स्वस्थ रहने के लिये है
सूबह जल्दी जागना ।
प्रगति हेतु करो तुम
योग की नीत साधना ।

प्रण करलो अब करेंगे
नियम से हर काम को ।
पश्रिम से कर दिखाओगे
सफल परिणाम को ।

रोष भी प्रकट न होगा
अब किसी की बात पर
विनम्रता स्वीकार होगी
विजय पर या मात पर ।

दुख न होगा अब किसी को भी
हमारे आचरण से
विश्वास से या भावना से
सत्य से अंतकरण से ।

अपानायेंगे निज सभ्यता को
अब नया जीवन जियेंगे
संस्कारों के चषक में
उत्सव का अमृत पियेंगे ।

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