Friday, June 1, 2007
2.पहिले करना चिंतन
जल्दी काम कभी मत करना
पहिले करना चिंतन ।
परख करोगे जिस माटी की
वह बनती है कंचन ।
बिना सोच का काम कभी भी
सफल नहीं होता है
समझ-बुझ कर कूआ खोदने से
पानी आता है ।
बिना साधना के गायक क्या
गायक बन जाता है।
सज्जनता के बिना मनुष्य को
कभी न यश मिलता है ।
वृक्ष वहीं पूजे जाते हैं
जिनसे सुरभि कलश मिलता है ।
वह जीवन क्या जो केवल
स्वांसे गिनने को आया ।
बिना सुगंध बिखेरे जग में
सुमन कभी मुरझाया ।
समय का जो मूल्य जानते
उनका शत-शत वंदन ।
मातृभूमि का वो करते
सम्मान-मान-अभिनंदन.....
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